Pular para o conteúdo
Publicidade

Mateus 25

दस ुंवतिों ां

1 "वरग-रउस रच25:1 द्वारचार: वर के स्वागत करने की प्रथा. समिसमें दस ुंवतिां अपने-अपनकर रचििकलीं. 2 उनमें ांतथांसमझद. 3 वतिों अपनअपनििंनहीं; 4 परसमझदवतिों अपनों बरतन रख ि. 5 वर पहुंचनें रण उनें ींआनलगऔर गई.

6 "आधयह मधशबिा: वर पहुंरहै! उससेंिहर .

7 "सभवतिां उठीं और अपने-अपनकरनलगीं. 8 वतिों समझदवतिों िनती, अपनें हमें ो—हमरहैं.’

9 "िंसमझदवतिों उनें उततर िा, हमऔर ों िनहीं ा. भलयह ि कर िों अपनिो.’

10 "जब रहि वर पहुंऔर वतिां, ी, वर िभवन ें चलगईऔर कर िगया.

11 "समय अनवतिां गईऔर िनतकरनलगीं, ! हमिि.

12 "िंउसनउनें उततर िा, सच यह ि ैं ें नतनहीं.’

13 "इसलिइसरकहमगततथसचरहोंि उस िनतऔर उस घड़ी ो.

Veja também