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मत्तियाह 26

तसमनबगें अवरणनदन

36 तब उनकतसमनमक पर पहुंे. उनोंअपनिों कहा, "यहीं जब तक ैं वहां कर थनकरतूं." 37 िवह तरऔर ़ेिों ों अपनआगचलगए. वहां अतउदऔर लगे. 38 उनोंिों कहा, "इतनअधिउदैं, रहो. गतरहो."

39 तब उनस़ी बल िरकर थनकरनलगे. उनोंपरमवर िदन िा, "िा, यदि भव यह झसटल ; िनहीं परआपकइचअनो."

40 जब वह अपनिों उनें उनोंतरकहा, "अचा, एक सजग रह सके! 41 सजग रहो, थनकरतरहो, ऐसि परें पड. ां, िःआतिंशरबल."

42 तब सरकर थनी, "िा, यदि यह ििझसटल नहीं सकतआप इचो."

43 वह टकर आए ि िैं—ोंि उनकपलकें िी. 44 एक िवह उनें आगचलगए और सरथनऔर उनोंथनें वहसब हरा.

45 तब वह िों और उनसकहा, "अभरहऔर आरकर रहो? बहगया! ो! गयवह षण! मनिों ों पकडरहै. 46 उठो! यहां चलें. ो, पकडपर ै, वह गया!"

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