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मत्तियाह 27

51 उसषण िपरऊपर तक ों ें ििकर िगया, ांउठी, चटें फट गई52 और कबें गईं. नरउन अनपविों शरिकर िगये, बड़ी ींें े. 53 कबों हर आकर उनोंपविनगर ें रवितथअनों िि.

54 शतिपति और े, उसकपहररहे, उस तथअनघटनखकर अतभयभगए और कहनलगे, "सचमयह परमवर े!"

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