जंगल में शैतान द्वारा मसीह येशु की परख
1 इसके बाद पवित्र आत्मा के निर्देश में येशु को बंजर भूमि ले जाया गया कि वह शैतान द्वारा परखे जाएं. 2 उन्होंने चालीस दिन और चालीस रात उपवास किया. उसके बाद जब उन्हें भूख लगी, 3 परखने वाले ने उनके पास आकर कहा, "यदि तुम परमेश्वर-पुत्र हो तो इन पत्थरों को आज्ञा दो कि ये रोटी बन जाएं."
4 येशु ने उसे उत्तर दिया, "मनुष्य का जीवन सिर्फ भोजन पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के मुख से निकले हुए हर एक शब्द पर भी निर्भर है."4:4 व्यव 8:3
5 तब शैतान ने येशु को पवित्र नगर में ले जाकर मंदिर के शीर्ष पर खड़ा कर दिया 6 और उनसे कहा, "यदि तुम परमेश्वर-पुत्र हो तो यहां से नीचे कूद जाओ, क्योंकि लिखा है,
"वह अपने स्वर्गदूतों को तुम्हारे संबंध में
आज्ञा देंगे तथा वे तुम्हें हाथों-हाथ उठा लेंगे
कि तुम्हारे पैर को पत्थर से चोट न लगे."4:6 स्तोत्र 91:11, 12
7 उसके उत्तर में येशु ने उससे कहा, "यह भी तो लिखा है तुम प्रभु अपने परमेश्वर को न परखो."4:7 व्यव 6:16
8 तब शैतान येशु को अत्यंत ऊंचे पर्वत पर ले गया और विश्व के सारे राज्य और उनका सारा ऐश्वर्य दिखाते हुए उनसे कहा, 9 "मैं ये सब तुम्हें दे दूंगा यदि तुम मेरी दंडवत-वंदना करो."
10 इस पर येशु ने उसे उत्तर दिया, "हट, शैतान! दूर हो! क्योंकि लिखा है, तुम सिर्फ प्रभु अपने परमेश्वर की ही आराधना और सेवा किया करो."4:10 व्यव 6:13
11 तब शैतान उन्हें छोड़कर चला गया और स्वर्गदूत आए और उनकी सेवा करने लगे.