29 यदि तुम्हारी दायीं आंख तुम्हारे लड़खड़ाने का कारण बनती है तो उसे निकाल फेंको. तुम्हारे सारे शरीर को नर्क में झोंक दिया जाए इससे तो उत्तम यह है कि तुम्हारे शरीर का एक ही अंग नाश हो. 30 यदि तुम्हारा दायां हाथ तुम्हें विनाश के गड्ढे में गिराने के लिए उत्तरदायी है तो उसे काटकर फेंक दो. तुम्हारे सारे शरीर को नरक में झोंक दिया जाए इससे तो उत्तम यह है कि तुम्हारे शरीर का एक ही अंग नाश हो.
मत्तियाह 5:29,30
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- HSB Hindi Standard Bible
29 यदि तेरी दाहिनी आँख तेरे लिए ठोकर का कारण बनती है, तो उसे निकालकर अपने से दूर फेंक दे, क्योंकि तेरे लिए भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। 30 यदि तेरा दाहिना हाथ तेरे लिए ठोकर का कारण बनता है, तो उसे काटकर अपने से दूर फेंक दे, क्योंकि तेरे लिए भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए।
- IRVHIN Indian Revised Version (IRV) Hindi - 2019
29 यदि तेरी दाहिनी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर अपने पास से फेंक दे; क्योंकि तेरे लिये यही भला है कि तेरे अंगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए। 30 और यदि तेरा दाहिना हाथ तुझे ठोकर खिलाए, तो उसको काटकर अपने पास से फेंक दे, क्योंकि तेरे लिये यही भला है, कि तेरे अंगों में से एक नाश हो जाए और तेरा सारा शरीर नरक में न डाला जाए।
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