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Mateus 5

शतकरनि

43 "ें यह ि यह कहगया: अपनपड़ोकर5:43 लेवी 19:18 और अपनशता.’ 44 िंमसकहनि अपनशतकर5:44 कुछ उत्तरवर्ती पाण्डुलिपियों के अनुसार: उन्हें आशीर्वाद दो, जो तुम्हें शाप देते हैं, उनका हित करो, जिन्हें तुमसे घृणा है. और अपनसतों िथना; 45 ि अपनवरि, ोंि और भलों पर दय करतैं. इसरकधरतथअधरी, ों पर वरैं. 46 यदि उनीं करतो, मसकरतैं िरतिफल अधिो? ुंयहनहीं करते? 47 यदि अपननमसकरतअनों अतििऐससरहनकर रहो? र-यहऐसनहीं करते? 48 इसलिि िबनो, वरििैं.

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