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मत्तियाह 8

अधिि

5 जब कफरनहनगर ें रविा, तब एक शतिपति आकर उनसनमरतवक िदन िा, 6 "रभु, घर पर वक लकव़िऔर वह ़ा ें ै."

7 उसआशसन िा, "ैं आकर उसकरूंा."

8 िंशतिपति कहा, "नहीं रभु, नहीं, ैं इस नहीं ि आप घर आएं. आप वल ुंकह िऔर वक वसएगा. 9 ैं वयबड़े अधििों अधिूं और िअधिें ैं. ैं िआदूं, !वह ै, और िआदूं, इधर आओ!वह आतै. अपनवक कहतूं, यह करो!’ वह वहकरतै."

10 यह नकर आशचरयचकिरह गए. उनोंरहकहा, "यह एक सच ि ैंइसएल ें िें ऐसिनहीं ा. 11 ैं ें िकरनहतूं ि वरग-रें अब, िसहऔर ें ििऔर पशििअनआकर गति करेंे, 12 िंिहर धकें ेंिे. वह ऐसजहां और ांसनरहा."

13 तब शतिपति कहा, ", ििै." उसषण वह वक गया.

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