3 तुम्हारे हृदय के अहंकार ने ही तुम्हें धोखा दिया है,
तुम, जो चट्टान के निकले भाग पर निवास करते हो
और अपना घर ऊंचाई पर बनाते हो,
तुम जो अपने आपसे कहते हो,
‘किसमें दम है, जो मुझे नीचे भूमि पर ला सके?’
3 तुम्हारे हृदय के अहंकार ने ही तुम्हें धोखा दिया है,
तुम, जो चट्टान के निकले भाग पर निवास करते हो
और अपना घर ऊंचाई पर बनाते हो,
तुम जो अपने आपसे कहते हो,
‘किसमें दम है, जो मुझे नीचे भूमि पर ला सके?’