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होशेआ 12

1 एफईम हवअपनजन बनै;

वह िकरत

और अपनऔर िंबढ़ारहतै.

वह अशि करत

और िजतै.

2 यहििहवआरै;

वह 12:2 याकोब अर्थ वह एड़ी पकड़ता है अर्थात् वह धोखा देता है उसकलचलन अनें

और उसकों अनउसकबदलेंे.

3 जब अपनां अपनएड़ी जकडी;

एक मनें उसनपरमवर घरिा.

4 उसनवरगदघरिऔर उस पर रबल ;

वह और उससि ििनती.

ें वह परमवर ि

और वहां उसनउनसें ी—

5 हवसरवशकिपरमवर,

हवउनकै!

6 पर अवशि अपनपरमवर ो;

और ें बनरहो,

और हमअपनपरमवर पर िभर रहो.

7 गलत उपयकरत

और छल करनउसकअचलगतै,

8 एफईम घमकरतै,

"ैं बहधनवूं; ैं धनगयूं.

पति सहिझमें

अपरनहीं े."

9 "जब ििकलकर आये,

ैं हवपरमवर ूं;

ैं िें ें िकरा,

ि ठहरिों ें करता.

10 ैंभवियवकिा,

उनें कई दरशन ि

और उनकयम अनांबते."

11 िलआद ै?

इसकैं!

िलगें ों बलिकरतैं?

उनकिां गयें

पतथरों समोंी.

12 अरगया;

इसएल एक पतिी,

और उसकिउसऩें चर.

13 हविइसएल िलनिएक भवियवकउपयिा,

एक भवियवकउसनउसकरखा.

14 पर एफईम हवबहभडै;

उसकरभउसकिगयउसपर रहन

और उसकअनदर िउसकबदलएगा.

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