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Sofonias 1

1 हवयह वचन यहिअमिसनकें ़ेफनिआया; नया, िा, िअमरितथअमरिििा:

हविें पर

2 "ैं

़ों िूंा,"

हवयह षणै.

3 "ैं मनतथपशों नषकर ूंा;

ैं आकपकिों

और सममछलिों नषकर ूंा;

और िों नषकर ूंा, जन िरनरण बनतैं."

"जब ैं सब

मनों िूंा,"

हवयह षणै,

4 "ैं यहिि

और शलसब ििों िअपनबढ़ाा.

ैं इस वतउपसनकरनहर बचो,

और ि करनिों तक िूंा.

5 ैं उनें िूंा,

अपनछतों पर ककर आकों उपसनकरतैं,

ककर हवकसम ैं

और वतमलककसम ैं,

6 उनें ी, हवचलनिैं

और हवकरतैं और उसकइचननिकरतैं."

7 परम हवमनरहो,

ोंि हवििकट ै.

हवएक बलििै;

उनोंउनकपवििअलग रखै, िें उनोंआमििै.

8 "हवठहरबलिचढ़ाि

ैं करमचिों और जकों

और उन सभूंा,

िकपड़े

पहनतैं.

9 उस िैं उन सभूं

िटक पर रखनबचतैं,1:9 1 शमु 5:5

अपनवति

िंऔर छल भर ैं.

10 "उस ि"

हवषणकरतैं,

"मछली-आव,

नगर नए बसिवर,

और पह़िों बड़े धमआवी.

11 रविें रहतो, िकरो;

ोंि िों ो,

और ांसब यवसकरनों नषकर िएगा.

12 उस समय ैं पक कर शलें ूं

और उनें ूंा, आतम-सैं,

तलछट ें ़े गयखरस समैं,

यह चतैं, हवनहीं करेंे,

भलकरेंऔर ा.’

13 उनकधन िएगा,

और उनकघर ढह े.

यदयपि घर बनैं,

िंउनमें नहीं रह सकेंे;

यदयपि लगे,

िंउससबनखमधनहीं सकेंे."

14 हवभयनक ििकट ै—

यह िकट और जलरहै.

हविभयनक ै;

बड़ा ुःरण ट-फटकर दन करतै.

15 वह िा,

कट और ़ा ि,

परऔर िि,

धकऔर गम ि,

घनघघटऔर धकि,

16 गढशहरों ि

और रहरी-ों ि

वह रहूंकनऔर ललकिा.

17 "ैं नव ि पर ऐसिपति ा,

ि ऐसटटेंे, यकि टटलतैं,

ोंि उनोंहवििै.

उनकसम

और उनकतड़ी बर समेंएगी.

18 हवि,

उनकां

और उनकउनकबचएगा."

उसकजलन आग ें

भसएगी,

ोंि वह उन सबकअचनक कर

पर रहतैं.

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