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दरसन 15

वरगदअऊ मह

1 तब ेंअकएक ठन अऊ महअऊ अदिनहां ें: वरगदठन महधररहमन आखििपति , बरकि एकर परमसर ी। 2 अऊ ेंअइसनें, जऊन आगिांएक समुंदर सहीं िखत रहय अऊ ांसमुंदर मनखमन ़े िि, जऊन मन पसअऊ ओकर रतअऊ ओकर ांिऊपर जय ििओमन परमसर िगय मन धररह3 अऊ ओमन परमसर वक अऊ ़ा-वत रह:

"सरवसकिपरभपरमसर!

महअऊ अद

ि-ि ा!

रसतसहअऊ सच

4 परभू! जमझन भय नहीं,

अऊ ांमहिकरहीं।

बरकि ेंपबितर अस

जममनखमन आहीं

अऊ अरधनकरहीं,

बरकि धरमममन परगट हव"15:4 भजन 111:2, 3; ब्यव 32:4; यर 10:7; भजन 86:9; 98:2

5 एकर ेंवरग िि करपबितर-तमें, जऊन 6 अऊ िवरगदिकलि, मन करठन महरहयवरगदतमन अऊ चमकत सन कपड़ा पहिरहअऊ ओमन नहरपटरहय7 तब यत परएक झन ों वरगदतमन ठन कट, जऊन ग-जतक यत रहइयपरमसर भररहय8 अऊ परमसर महिअऊ ओकर मररन िभर अऊ ितर नइसकि, जब तक ि वरगदतमन महमन नइ

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