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दरसन 19:1-3

स्वरग म इस्तुति के गीत

1 एकर बाद मेंह स्वरग म, एक बड़े भीड़ के गरजन सहीं अवाज सुनेंव, जऊन ह चिचियाके ये कहत रहय:

"हलिलूयाह!

उद्धार, महिमा अऊ सामर्थ हमर परमेसर के अय,

2 काबरकि ओकर नियाय सच्चा अऊ सही अय।

ओह ओ बड़े बेस्या ला दंड दे हवय,

जऊन ह अपन छिनारीपन ले धरती के मनखेमन ला खराप करत रिहिस।

परमेसर ह ओकर ले अपन सेवकमन के लहू के बदला ले हवय।"

3 ओमन फेर चिचियाके कहिन:

"हलिलूयाह!

ओ बड़े सहर के जरे के धुआं जुग-जुग तक उठत रहिथे।"

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