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दरसन 19

वरग इसि

1 एकर ेंवरग , एक बड़े गरजन सहीं अवें, जऊन ििकहत रहय:

"हलि!

उद, महिअऊ मरहमर परमसर अय,

2 बरकि ओकर िसचअऊ सहअय

ओह बड़े हवय,

जऊन अपन िपन धरतमनखमन खरकरत िि

परमसर ओकर अपन वकमन लहबदलहवय"

3 ओमन ििकहि:

"हलि!

बड़े सहर जरग-जतक उठत रहिे।"

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