12 तुमन पबितर अऊ बहुंते मयारू अव। एकरसेति, परमेसर के चुने मनखेमन सहीं, अपनआप ला करूना, दया, दीनता, नमरता अऊ धीरज ले भर लेवव। 13 एक-दूसर के सहन करव अऊ एक-दूसर ला छेमा करव, चाहे एक-दूसर के बिरोध म कोनो घलो किसम के सिकायत होवय। छेमा करव, जइसने परभू ह तुमन ला छेमा करिस। 14 अऊ ये जम्मो बात के ऊपर मया ला बनाय रखव, जऊन ह तुमन ला सही एकता म एक संग बांधके रखथे।
15 मसीह के सांति तुम्हर हिरदय म बने रहय, जइसने कि तुमन एक देहें के अंग के रूप म बलाय गे हवव। अऊ धनबाद देवइया बने रहव।