11 ये बात के खियाल रखव कि मेंह तुमन ला आज ओकर जऊन हुकूम, कानून अऊ बिधिमन ला देवत हंव, ओमन ला नइं मानके यहोवा अपन परमेसर ला झन भूलव। 12 नइं तो, जब तुमन जी भरके खाथव, जब तुमन सुघर घर बनाथव अऊ रहे लगथव, 13 अऊ जब तुम्हर गाय-बईला अऊ भेड़-बकरी के झुंड ह बहुंत बढ़थे अऊ तुम्हर सोन अऊ चांदी ह बढ़थे अऊ तुम्हर जम्मो चीज म बढ़ोतरी होथे, 14 त तुम्हर मन ह घमंडी हो जाही अऊ तुमन यहोवा अपन परमेसर ला भुला जाहू, जऊन ह तुमन ला मिसर देस ले, याने कि बंधुवई के देस ले बाहिर निकाल लानिस। 17 तुमन अपनआप ले कह सकत हव, "मोर सक्ति अऊ मोर हांथ के ताकत ले मेंह मोर बर ये संपत्ति बनाय हवंव।" 18 पर यहोवा अपन परमेसर ला सुरता रखव, काबरकि येह ओहीच अय, जऊन ह तुमन ला संपत्ति बनाय के योग्यता देथे, अऊ ये किसम ले ओह अपन करार ला मजबूत करथे, जेला ओह तुम्हर पुरखामन संग सपथ खाके करे रिहिस, जइसे कि येह आज दिखत हे।
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