21 उहां, अहवा नहर के तीर म, मेंह उपास रखे के घोसना करेंव, ताकि हमन अपनआप ला हमर परमेसर के आघू म दीन करन; अऊ ओकर ले यातरा के दौरान अपन अऊ अपन लइका अऊ अपन जम्मो संपत्ति बर सुरकछा के पराथना करन।
21 उहां, अहवा नहर के तीर म, मेंह उपास रखे के घोसना करेंव, ताकि हमन अपनआप ला हमर परमेसर के आघू म दीन करन; अऊ ओकर ले यातरा के दौरान अपन अऊ अपन लइका अऊ अपन जम्मो संपत्ति बर सुरकछा के पराथना करन।
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