63 एक दिन सांझ के बेरा ओह मैदान म मनन-चिंतन करे बर निकले रिहिस, अऊ जब ओह आंखी उठाके देखिस, त का देखिस कि ऊंटमन आवत रहंय।
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63 एक दिन सांझ के बेरा ओह मैदान म मनन-चिंतन करे बर निकले रिहिस, अऊ जब ओह आंखी उठाके देखिस, त का देखिस कि ऊंटमन आवत रहंय।
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