1 तब यहोवा ह नूह ला कहिस, "तें अपन पूरा घराना समेत जहाज म जा, काबरकि मेंह ये पीढ़ी के मनखे म तोला अपन नजर म धरमी पाय हंव।
6 नूह के उमर छै सौ साल रिहिस, जब धरती ऊपर जल-परलय आईस। 7 नूह ह अपन बेटा, घरवाली अऊ बहुमन के संग जल-परलय ले बांचे बर जहाज भीतर गीस।
11 नूह के जिनगी के छै सौवां साल के दूसरा महिना के सतरहवां दिन गहिरा समुंदर के सोतामन फूट गीन अऊ अकास के पानी के झरोखामन घलो खुल गीन।
13 ठीक ओही दिन नूह अपन बेटा सेम, हाम, येपेत अऊ अपन घरवाली अऊ तीनों बहुमन संग जहाज भीतर गीस। 16 जऊन पसुमन भीतर जावत रिहिन, ओमा हर किसम के जीव-जन्तु के नर अऊ मादा रिहिन जइसने कि परमेसर ह नूह ला हुकूम दे रिहिस। तब यहोवा ह नूह के भीतर जाय के बाद जहाज के कपाट ला बंद कर दीस।
17 धरती म चालीस दिन तक पानी के परलय होते रिहिस, अऊ जइसे-जइसे पानी बढ़त गीस, वइसे-वइसे जहाज ह धरती ले ऊपर उठत गीस। 18 पानी बढ़त-बढ़त धरती ऊपर बहुंत हो गे अऊ जहाज पानी ऊपर तउंरे लगिस।
24 अऊ पानी धरती ऊपर एक सौ पचास दिन तक भरे रिहिस।