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उतपत्ती 8:3,4,11,13,20

3 अऊ पानी ह धरती ले लगातार कम होवत गीस। एक सौ पचास दिन के बाद पानी ह कम होय लगिस; 4 अऊ साल के सातवां महिना के सतरहवां दिन जहाज ह अरारात नांव के पहाड़ म टेक गीस।

11 जब ओ पंड़की ह सांझकुन नूह करा लहुंटके आईस, त ओह देखिस कि पंड़की के चोंच म जैतून के एक नवां पान हवय! तब नूह ह जान डारिस कि पानी धरती ऊपर ले अंटा गे हे।

13 नूह के उमर के छै सौ एक बछर के पहिला महिना के पहिला दिन, पानी ह धरती ऊपर ले सूखा गीस। नूह ह तब जहाज के छानी ला खोल दीस अऊ देखिस कि धरती ह सूखा गे हे।

20 तब नूह ह यहोवा बर एक बेदी बनाईस, अऊ जम्मो सुध पसु अऊ जम्मो सुध चिरई म ले थोर-थोर लेके बेदी ऊपर होम-बलिदान करिस।

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