14 काबरकि परमेसर ह गोठियाथे जरूर—कभू एक रीति ले, त कभू आने रीति ले—
हालाकि येला कोनो मनखे नइं समझंय।
15 कभू सपना म, कभू रथिया दरसन म,
जब मनखेमन बहुंत नींद म परे रहिथें
अपन बिस्तर म आलस के मारे झपकी लेवत रहिथें,
14 काबरकि परमेसर ह गोठियाथे जरूर—कभू एक रीति ले, त कभू आने रीति ले—
हालाकि येला कोनो मनखे नइं समझंय।
15 कभू सपना म, कभू रथिया दरसन म,
जब मनखेमन बहुंत नींद म परे रहिथें
अपन बिस्तर म आलस के मारे झपकी लेवत रहिथें,