5 यहोवा ह ये कहत हे:
"सरापित ए ओ मनखे, जऊन ह मनखे ऊपर भरोसा करथे,
जऊन ह मनखे के सहारा लेथे
अऊ जेकर मन ह यहोवा ले भटक जाथे।
6 ओ मनखे ह बंजर भुइयां के झाड़ी सहीं होही;
अऊ जब उन्नति के समय आही, त ओह ओला नइं देख सकही।
ओह सुन्ना जगह म गरमी ले झुलसत भुइयां म निवास करही,
अइसने नूनचूर भुइयां म निवास करही, जिहां कोनो नइं रहंय।