हतिया के घाटी
30 " ‘यहूदा के मनखेमन मोर नजर म दुस्ट काम करे हवंय, यहोवा ह घोसना करत हे। ओमन ओ घर म घिनौना मूरतीमन ला रखे हवंय, जेमा मोर नांव हवय; अइसने करके ओमन ओ घर ला असुध कर दे हवंय। 31 ओमन बेन-हिन्नोम के घाटी म अपन बेटा अऊ बेटीमन ला आगी म जलाय बर तोपेत के ऊंचहा जगहमन ला बनाय हवंय—जेकर हुकूम मेंह कभू नइं दे रहेंव अऊ न ही ये बात कभू मोर मन म आईस। 32 एकरसेति सचेत रहव, ओ दिनमन आवत हें, यहोवा ह ये घोसना करत हे, जब मनखेमन येला तोपेत या बेन-हिन्नोम के घाटी नइं कहिहीं, पर येला हतिया के घाटी कहिहीं, काबरकि ओमन तोपेत म अतेक मनखेमन ला माटी दीहीं कि उहां जगह ही नइं बचही। 33 तब ये मनखेमन के लासमन चिरई अऊ जंगली पसुमन के जेवन होहीं, अऊ ओमन ला भगानेवाला कोनो नइं होहीं।