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अयूब 1:4,5,18,19

4 ओकर बेटामन अपन जनम दिन म अपन घर म एक-दूसर ला बलाके भोज के आयोजन करंय, अऊ ओमन अपन तीनों बहिनीमन ला घलो अपन संग खाय-पीये बर नेवता देवंय। 5 जब भी भोज खाय के दिन ह बीत जावय, त अयूब ह ओमन ला सुध करे के परबंध करय। बड़े बिहनियां, ओह ओमन के हर एक झन बर ये सोचके होम-बलिदान करय, "सायद मोर लइकामन पाप करे होहीं अऊ अपन मन म परमेसर के बिरोध म काम करे होहीं।" अयूब ह हमेसा अइसने करय।

18 ओह अभी अइसने कहितेच रिहिस कि एक आने संदेसिया आके कहिस, "तोर बेटा-बेटीमन अपन बड़े भईया के घर म खावत रिहिन अऊ अंगूर के मंद पीयत रिहिन 19 कि अचानक सुनसान जगह ले एक भयंकर आंधी आईस अऊ घर के चारों कोनटा ला अइसन मारिस कि घर ह ओमन ऊपर गिर पड़िस अऊ ओमन मर गीन। मेंहीच ह एके झन बांचके तोला बताय बर आय हवंव!"

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