12 पर बुद्धि ह कहां मिल सकथे?
ओ जगह कहां हवय, जिहां समझ ह रहिथे।
13 कोनो मरनहार मनखे येकर कीमत नइं जान सकय;
येह जीयत परानीमन के लोक म नइं मिलय।
14 समुंदर के गहरई ह कहिथे, "बुद्धि ह मोर म नइं ए";
समुंदर ह कहिथे, "बुद्धि ह मोर करा नइं ए।"
15 चोखा सोन ले येला बिसाय नइं जा सकय,
अऊ न ही येकर कीमत बर चांदी ला तऊले जा सकथे।
16 येला ओपीर के सोन ले बिसाय नइं जा सकय,
येला कीमती गोमेदक या नीलमनि ले घलो बिसाय नइं जा सकय।
17 न सोन, न कांच के तुलना येकर संग करे जा सकथे,
न ही सोन के जेवर के बलदा म येह मिल सकथे।
18 मूंगा अऊ मनि के येकर आघू म चरचा करई ह बेकार अय;
बुद्धि के कीमत ह मानिक ले घलो बढ़के अय।
19 कूस के पुखराज के तुलना येकर संग करे नइं जा सकय;
येला चोखा सोन ले बिसाय नइं जा सकय।
20 त फेर बुद्धि ह कहां ले आथे?
समझ ह कहां रहिथे?
21 येह हर एक जीयत चीज के आंखी ले छुपे हवय,
अऊ त अऊ अकास के चिरईमन के आंखी घलो येला नइं देख सकंय।
22 बिनास अऊ मिरतू कहिथें,
"सिरिप येकर अफवाह ला हमन सुने हवन।"