13 ओह ऊन अऊ सन छांटथे
अऊ खुस होके अपन हांथ ले काम करथे।
14 ओह बेपारी जहाज के सहीं
अपन जेवन दूरिहा ले लानथे।
15 ओह रथिया के रहत उठ जाथे;
ओह अपन परिवार के जेवन के परबंध करथे
अऊ अपन सेविकामन ला घलो ओमन के हिस्सा देथे।
16 ओह कोनो खेत ला सोच-बिचार करके बिसाथे;
ओह अपन कमई ले अंगूर के बारी लगाथे।
17 ओह मेहनत से अपन काम ला जमाथे;
ओकर हांथमन ओकर काम बर मजबूत होथें।
18 ओह ये बात के धियान रखथे कि ओला ओकर काम-धंधा म लाभ मिलय,
अऊ रथिया ओकर दीया ह झन बुतावय।
19 ओह अटेरन ला अपन हांथ म धरथे
अऊ चरखा के धुरा ला अपन अंगरी म पकड़थे।
20 ओह गरीबमन के मदद करे बर अपन हांथ खोलथे
अऊ जरूरतमंद मनखे बर अपन हांथ बढ़ाथे।