25 ओह बल अऊ सम्मान के पहिरावा पहिरे रहिथे;
ओह अवइया समय ऊपर हंस सकथे।
26 ओह बुद्धि के संग गोठियाथे,
अऊ ओकर मुहूं ले सच्चई के सिकछा निकलथे।
25 ओह बल अऊ सम्मान के पहिरावा पहिरे रहिथे;
ओह अवइया समय ऊपर हंस सकथे।
26 ओह बुद्धि के संग गोठियाथे,
अऊ ओकर मुहूं ले सच्चई के सिकछा निकलथे।