मुरूखता के बिरूध चेतउनी
1 हे मोर बेटा, यदि तेंह अपन परोसी बर जमानत ले हस,
या कोनो अजनबी बर अपन चीज गिरवी म दे हस,
2 तेंह अपन ही बात म फंस गे हस,
अऊ अपन ही बात म पकड़े गे हस।
3 त हे मोर बेटा, अपनआप ला बंचाय बर अइसे कर,
जब तेंह अपन परोसी के हांथ म पड़ गे हस:
त, जा, जल्दी कर,6:3 या जा अऊ अपनआप ला नम्र कर,
अऊ तुरते अपन परोसी ले बिनती कर।
4 जागत रह;
अपन आंखी म झपकी घलो झन आवन दे।
5 अपनआप ला छुड़ा, जइसे हिरन ह सिकारी के हांथ ले,
अऊ चिरई ह चिड़ीमार के जाल ले अपनआप ला छुड़ाथे।