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नीतिबचन 6:32-35

32 जऊन ह बेभिचार करथे, ओकर करा बुद्धि नइं ए;

जऊन ह अइसे करथे, ओह अपनआप ला नास करथे।

33 ओह मार खाथे अऊ अपमानित होथे,

अऊ ओकर कलंक ह कभू नइं मिटय।

34 काबरकि जलन ह घरवाला ला बहुंत गुस्सा देवाथे,

अऊ बदला लेवत बेरा ओह दया नइं करय।

35 ओह नुकसान के भरपई नइं चाहय;

ओला जतका भी घूस दे दव, ओह नइं मानय।

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