बुद्धि के बुलावा
1 का बुद्धि ह नइं पुकारय?
का समझ ह ऊंचहा अवाज म नइं बोलय?
10 चांदी के बदले मोर सिकछा ला चुनव,
अऊ सुध सोन के बदले मोर गियान ला लव,
11 काबरकि बुद्धि ह मनि ले जादा कीमती अय,
अऊ कोनो भी मनभावन चीज के तुलना येकर ले नइं करे जा सकय।
12 "में बुद्धि अंव अऊ समझदारी के संग रहिथंव;
गियान अऊ बिबेक मोर म हवय।
13 यहोवा के भय मनई के मतलब बुरई ले घिन करई अय।
मेंह घमंड अऊ जिद्दीपन,
खराप बरताव अऊ बुरई के बात ले घिन करथंव।
32 "एकरसेति, अब हे मोर लइकामन, मोर बात ला सुनव;
धइन अंय ओमन, जऊन मन मोर बताय रसता म चलथें।
33 मोर सिकछा ला सुनव अऊ बुद्धिमान बनव;
येला तुछ झन जानव।
34 धइन अंय ओमन, जऊन मन मोर गोठ ला सुनथें,
अऊ मोर कपाट करा हर दिन रखवारी करथें,
अऊ मोर कपाट के रसता म अगोरत रहिथें।
35 काबरकि जऊन मन मोला पाथें, ओमन जिनगी पाथें
अऊ यहोवा ओमन ऊपर किरपा करथे।
36 पर जऊन मन मोला पाय म असफल होथें, ओमन अपन के हानि करथें;
ओ जम्मो जऊन मन मोर ले घिन करथें, ओमन मिरतू ले मया करथें।"