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नीतिबचन 9:1-6,10

बुद्धि अऊ मुरूखता के नेवता

1 बुद्धि ह अपन घर बनाईस;

ओह येकर सात ठन खंभा बनाय हवय।

2 ओह अपन पसु के मांस रांधे हवय अऊ अंगूर के मंद तियार करे हवय;

अऊ खाना खाय बर अपन मेज म रखे हवय।

3 ओह अपन सेवकमन ला पठोय हवय,

अऊ ओह सहर के सबले ऊंच जगह ले, ये कहिके बलाथे,

4 "जऊन मन सीधा-साधा अंय, ओमन मोर घर म आवंय!"

जऊन मन निरबुद्धि अंय, ओमन ला ओह कहिथे,

5 "आवव, मोर खाना खावव

अऊ मोर तियार करे गे अंगूर के मंद ला पीयव।

6 अपन सीधा-साधा रसता ला छोंड़व, त तुमन जीयत रहिहू;

समझवाले रसता म चलव।"

10 यहोवा के भय मनई बुद्धि के सुरूआत अय,

पबितर परमेसर ला जानई समझ के बात अय।

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