9 ह बट सयन, बहत आनद मन!
ह बट यरसलम, जय-जयकर कर!
दखव, तमहर रज ह तमहर कर आवत ह,
ओह धरम अऊ बजय हक,
बनमर अऊ एक गदह ऊपर,
एक बछड ऊपर, गदह क एक बछड ऊपर सवर कर हवय।
9 ह बट सयन, बहत आनद मन!
ह बट यरसलम, जय-जयकर कर!
दखव, तमहर रज ह तमहर कर आवत ह,
ओह धरम अऊ बजय हक,
बनमर अऊ एक गदह ऊपर,
एक बछड ऊपर, गदह क एक बछड ऊपर सवर कर हवय।