1 ज़ै हुंह मणछा अर स्वर्ग दूता ज़ेही बोली बोलूं, अर पर झ़ूरी निं मेरै दिला दी कोही लै होए, तै हणीं मेरी गल्ला छ़ण-छ़ण अर छैंहीं करदी कांस्सी अर छ़छ़ाल़ा ज़ेही।
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1 ज़ै हुंह मणछा अर स्वर्ग दूता ज़ेही बोली बोलूं, अर पर झ़ूरी निं मेरै दिला दी कोही लै होए, तै हणीं मेरी गल्ला छ़ण-छ़ण अर छैंहीं करदी कांस्सी अर छ़छ़ाल़ा ज़ेही।