11 अह आसा मणछे ज़िन्दगीए बझ़ा ज़ेही, ज़ेभै हुंह लान्हअ त मेरी बोली, समझ़ अर बभार त लान्हैं ज़िहअ। पर ज़ांऊं हुंह ज़ुआन हुअ, मंऐं छ़ाडअ लान्हैं ज़िहअ सभाब।
Publicidade
Publicidade
11 अह आसा मणछे ज़िन्दगीए बझ़ा ज़ेही, ज़ेभै हुंह लान्हअ त मेरी बोली, समझ़ अर बभार त लान्हैं ज़िहअ। पर ज़ांऊं हुंह ज़ुआन हुअ, मंऐं छ़ाडअ लान्हैं ज़िहअ सभाब।