मसीही ठुहर
24 तम्हां का आसा थोघ कि ज़ेभै खास्सै ठुहर्नै आल़ै दहल़ै ठुहर दैणें मकाबलै लै ठुर्हा, तिन्नां मांझ़ै भेटा नांम सिधी एकी ई मणछा ज़ुंण ज़िता? तम्हैं ठुर्हा तिहै ई ताकि नांम ज़िती सके। 25 सोभ जोधै करा सोभी च़िज़ो फरेज़, ताकि तिंयां तेऊ मछैणैं आल़ै मुगटा ज़िती सके, पर हाम्हैं करा तेऊ मुगटे तैणीं मैन्थ ज़ुंण सदा लै रहा। 26 तैही ज़िऊआ हुंह आपणीं विश्वासा दी ज़िन्दगी नशाणैं बाखा ठुर्ही। एक कुश्ती लल़णैं आल़अ जोधअ निं बागरी दी धमुक्कै बाहंदअ पर सह बाहा आप्पू संघै दुजै जोधै लै। तेही ज़िऊआ हुंह आपणीं ज़िन्दगी खास मकसद डाही।
27 पर हुंह करा आपणीं देही आपणैं बशै ताकि किधी इहअ निं हआ कि हुंह होरी लै ज्ञैन खोज़ूं अर आप्पू होए हुंह बृथा।