4 पर हाम्हैं करा हर कामां करै ऐहा गल्ला प्रगट कि हाम्हैं आसा परमेशरे शुचै दास। हाम्हैं करा सबर, खरी दी, दल़िदरा संघै, दुख मसीबता संघै, 5 कोल़े मार खाई करै, कैद हई करै, हाल्लै-गोल्लै मांझ़ै, मैन्था संघै, बिहुदै रही करै, ब्रतू रही, 6 पबित्र रही, ज्ञैना करै, सबर करी, झींण करी, अर पबित्र आत्मां करै, शुचै दिलै दुजै झ़ूरी, 7 शुचै बैणा करै, परमेशरे शगती करै अर धर्में अस्त्र-शस्त्रा करै प्रच़ार ज़ुंण खाणैं हाथै बार करना लै अर खिंज़ै हाथा दी आप्पू बच़ाऊंणा आसा। 8 कई बारी करा लोग म्हारअ अदर अर कई बारी करा बेइज़ती, कई बारी बोला तिंयां म्हारै बारै बूरी गल्ला अर कई बारी सराहा। तिंयां बोला हाम्हां लै झ़ुठै पर तैबी बोला हाम्हैं शुचअ। 9 हाम्हैं ज़िन्दगी, काटा एही ज़िहअ कि हाम्हां निं कोहै ज़ाणदअ, तैबी आसा कई लोगा मांझ़ै हाम्हैं मशूर। कई लोग च़ाहा हाम्हां खुशीए समादा पिछ़ू मारनअ, तैबी आसा ज़िऊंदै, हाम्हैं आसा मार खाणैं आल़ै ज़िहै, पर ज़ानीं का निं तिंयां हाम्हां मारी सकदै।6:9 1 करि. 4:9; भज. 118:18
10 हाम्हैं घोर दुखा दी, ज़ाण्हिंआं पल़ै दै, पर सदा रहा मौज़-मस्ती मनाऊंदै, अर रैनै-गरीबा ज़िहै, ज़ाण्हिंआं, पर खास्सै मणछा दैआ हाम्हैं आत्मां दी सेठ बणाईं अर हाम्हैं आसा इहै, ज़हा का किछ़ बी निं आथी, तैबी आसा हाम्हां का सोभै गल्ला।