1 ज़ुंण हाम्हैं परमेशरा संघै काम करनै आल़ै आसा, म्हारी आसा तम्हां का एही अरज़ कि ज़ुंण परमेशरो जश तम्हां लै हुअ तेता निं ज़ांऐं दैई हणैं। 2 किल्हैकि पबित्र शास्त्रा दी बोला परमेशर इहअ,
"आपणैं ठीक बगती हेरी मंऐं तेरी शूणीं
अर उद्धारे धैल़ी किई मंऐं तेरी मज़त।"
भाल़ा एभै आसा सह "ठीक बगत" अर भाल़ा एभै आसा सह उद्धारो धैल़ी।
3 हाम्हैं निं च़ाहंदै कि म्हारै कामां दी कहा का खोट शुझिए अर नां हाम्हैं किज़ै इहअ करदै कि ज़ेता करै कहा आफ़त पल़े। किल्हैकि हाम्हैं आसा परमेशरे च़ाकरी करनै आल़ै।
4 पर हाम्हैं करा हर कामां करै ऐहा गल्ला प्रगट कि हाम्हैं आसा परमेशरे शुचै दास। हाम्हैं करा सबर, खरी दी, दल़िदरा संघै, दुख मसीबता संघै, 5 कोल़े मार खाई करै, कैद हई करै, हाल्लै-गोल्लै मांझ़ै, मैन्था संघै, बिहुदै रही करै, ब्रतू रही, 6 पबित्र रही, ज्ञैना करै, सबर करी, झींण करी, अर पबित्र आत्मां करै, शुचै दिलै दुजै झ़ूरी, 7 शुचै बैणा करै, परमेशरे शगती करै अर धर्में अस्त्र-शस्त्रा करै प्रच़ार ज़ुंण खाणैं हाथै बार करना लै अर खिंज़ै हाथा दी आप्पू बच़ाऊंणा आसा। 8 कई बारी करा लोग म्हारअ अदर अर कई बारी करा बेइज़ती, कई बारी बोला तिंयां म्हारै बारै बूरी गल्ला अर कई बारी सराहा। तिंयां बोला हाम्हां लै झ़ुठै पर तैबी बोला हाम्हैं शुचअ। 9 हाम्हैं ज़िन्दगी, काटा एही ज़िहअ कि हाम्हां निं कोहै ज़ाणदअ, तैबी आसा कई लोगा मांझ़ै हाम्हैं मशूर। कई लोग च़ाहा हाम्हां खुशीए समादा पिछ़ू मारनअ, तैबी आसा ज़िऊंदै, हाम्हैं आसा मार खाणैं आल़ै ज़िहै, पर ज़ानीं का निं तिंयां हाम्हां मारी सकदै।
10 हाम्हैं घोर दुखा दी, ज़ाण्हिंआं पल़ै दै, पर सदा रहा मौज़-मस्ती मनाऊंदै, अर रैनै-गरीबा ज़िहै, ज़ाण्हिंआं, पर खास्सै मणछा दैआ हाम्हैं आत्मां दी सेठ बणाईं अर हाम्हैं आसा इहै, ज़हा का किछ़ बी निं आथी, तैबी आसा हाम्हां का सोभै गल्ला।
11 ओ करिन्थ रहणैं आल़ै विश्वासी भाईओ, हाम्हैं किई तम्हां संघै खुल्ही करै गल्ला, हाम्हैं करा तम्हां संघै दिला का झ़ूरी। 12 हाम्हैं निं तम्हां संघै झ़ूरी करनअ छ़ाडदै, पर थारै ई दिलै निं हाम्हां लै झ़ूरी रही। 13 आपणैं शोहरू समझ़ी बोला हुंह तम्हां का इहअ कि तम्हैं बी करा तेते बदल़ै हाम्हां संघै झ़ूरी।
14 ज़ुंण प्रभू ईशू मसीहा दी विश्वास निं करदै तिन्नां संघै निं मेल़-ज़ोल़ आथी, किल्हैकि धर्म अर पापो कै मेल़-ज़ोल़ हणअ? न्हैरै अर प्रैश्शे कै संगत? 15 अर मसीहो निं राख्सा संघै किछ़ै मेल़-ज़ोल़ आथी! नां विश्वास करनै आल़ैओ तिन्नां संघै कोई रिश्तअ आथी ज़ुंण विश्वास निं करदै!
16 मुहुर्ती लै निं परमेशरे भबनै ज़ैगा आथी। किल्हैकि हाम्हैं, ज़िऊंदै परमेशरै भबन आसा, ज़िहअ परमेशरै पबित्र शास्त्रा दी आसा बोलअ द,
"मुंह बस्सणअ तिन्नां मणछा संघै
अर मुंह रहणअ तिन्नां मांझ़ै हांढदै-फिरदै।
हुंह हणअ तिन्नों परमेशर
अर तिंयां हणैं मेरै लोग।"
17 तैही बोला प्रभू हाम्हां लै पबित्र शास्त्रा दी,
"तिन्नां मांझ़ा का निखल़ा दूर
अर तिन्नां का रहा ज़ुदै।
छ़ोतलै काम निं करी, मुंह मनणै तम्हैं थिऐ, ज़ै तम्हैं शुचै होए।
18 हुंह हणअ थारअ बाब
अर तम्हैं हणैं मेरी लुआद।
"अह आसा सर्वशक्तिमान परमेशर बिधातो बैण।"