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ज्ञैन 2

सुख बी आसा बृथा

1 तेखअ सोठअ मंऐं आपणैं दिलै इहअ, "च़ल्‍ल, ऐबै करिए नंद अर ज़िन्दगी काटणी हास्सी-खेल्ही हुंह भाल़ूं हैनूं तेथ किहअ मज़अ एछा!" पर सह गल्‍ल बी भाल़ी मंऐं बृथा। 2 मंऐं भाल़अ इहअ कि हास्स-खेल्ह आसा बेगरी गल्‍ला अर नंद करी निं किछ़ै भलअ हंदअ। 3 खास्सअ बच़ार करनै का बाद सोठअ मंऐं इहअ कि ऐबै हैऊं-बतैऊं हुंह आपणैं दिला शूर-शराब झुटी करै अर मंऐं किअ बी, किल्हैकि मंऐं सोठअ इहअ कि एता करै काटा मणछ आपणीं होछ़ी ज़ेही ज़िन्दगी राज्ज़ी-मौज़ी।

4 मंऐं किऐ बडै-बडै काम, आप्पू लै बणाअं मंऐं बडअ घअर संघा लाऐ दाखे बाग। 5 मंऐं लाऐ आप्पू लै कई बाग ज़ेथ भांती-भांतीए फल़ा दैणैं आल़ै बूट होए, 6 तिन्‍नां बागा दी खण्हैं डुघै कुहै ताकि बागे डाल़ी-बुटी लै पाणीं दैई सके। 7 मंऐं आणै गलाम मोलै लई, आजू हुऐ तिन्‍नें शोहरू-शोहरी बी मेरै गलाम। मुखा हुऐ एतरै डागै-चैणें हेल़्ही कि आझ़ तैणीं निं एरुशलेम मुखा पैहलै कोहिए आथी तै! 8 होरी देशे राज़ करनै आल़ै मणछ दैआ तै मुंह सेटा सुन्‍नअ, च़ंदी अर किम्मती च़िज़ा पजैल़ी। खारकै मर्ध अर बेटल़ी बोला मेरै दिला बतैऊंणा लै गिहा, अर ज़ुंण बेटल़ी मेरै दिलै लोभा ती, सह डाही मंऐं आप्पू लै।

9 मुखा आजी ज़ेतरै बी एरुशलेम नगरी बस्सा तै, हुंह हुअ तिन्‍नां सोभी का खास्सअ मशूर अर खास्सअ अक्ली आल़अ। 10 मुंह भेटअ ज़िहअ हुंह च़ाहा तिहअ ई अर ज़ेथ मुंह खुशी भेटा ती, मंऐं किअ तिहअ ई। आपणैं इना कामां पिछ़ू सराहिआ त हुंह बेघै अर अह ई भेटअ मुंह मेरी मैन्थो पुआज़अ। 11 तेखअ लागअ हुंह आपणैं हाथै किऐ दै इना कामें बारै सोठदअ कि तेता लै मंऐं केही खास्सी मैन्थ किई, ज़िहअ बागरी पिछ़ू पल़णअ बृथा हआ, मुखा ज़ाण्हुंई ईंयां गल्‍ला बी तेही बृथा! पृथूई दी निं आफ़ता का सुआई किछ़ै भेटदअ!

मौत एछा सोभी लै!

12 हुंह लागअ इहअ सोठदअ, "मुंह बाद ज़ुंण मणछ राज़अ बणें, तेऊ इहअ किज़ै करनअ ज़ुंण हुंह निं करी सकअ?" तेखअ लागअ हुंह इहअ सोठदअ कि अक्ली आल़ै, ऐडै अर कबुधी काम किहै हआ। 13 तैबै जाई लागअ मुखा थोघ कि ज़िहअ न्हैरै का राम्बल़अ प्रैश्शअ हआ, तेही हआ ऐडी गल्‍ला का भली अक्ल। 14 अक्ल हआ मणछा लै दूई आछी ज़ेही, पर ऐडअ रहा न्हैरै बाखा हांढदअ लागी। पर तज़ी बी भाल़अ मंऐं इहअ कि अक्ली आल़ै अर ऐडै मणछे दशा हआ खिरी मरदी पलका एक्‍कै ज़ेही।

15 खिरी लागअ हुंह इहअ सोठदअ, "ज़ेही हालत ऐडै मणछे हआ, मेरी बी आसा तेही ई हालत, अक्ली आल़अ हई किज़ै पुआज़अ भेटअ मुंह? ज़ाथी निं किछ़ बी! अह गल्‍ल बी आसा बृथा। 16 च़ाऐ हाम्हैं अक्ली आल़ै होए, च़ाऐ ऐडै! एकी धैल़ै मरनै ई, अक्ली आल़अ होए या ऐडअ, लोग जाआ तेखअ तिन्‍नां छ़ेक्‍कै बिस्सरुई।" 17 तैही हुई मुंह आपणीं ज़िन्दगी का नफरत किल्हैकि एऊ संसारै ज़िहअ बी हआ, तेता करै पल़ा आफ़त ई। ईंयां सोभै गल्‍ला ज़ाण्हुंई मुखा बृथा ज़िहअ बागरी पिछ़ू पल़णअ बृथा हआ।

18 मुंह हुई संसारै आपणीं ज़िन्दगी का इहअ करै नफरत कि एऊ संसारै ज़ुंण मंऐं खास्सी मैन्थ करी झाल़अ, सह छ़ुटणअ मुखा इधी अर तेतो भलअ हणअ मुंह बाद कहा होरी मणछो! 19 कुंण ज़ाणें कि ज़हा मेरी ज़ैदात भेटणीं, सह अक्ली आल़अ होए कि ऐडअ? पर तज़ी बी हणअ सह मेरी सारी ज़िन्दगीए कमाईओ मालक ज़ुंण मंऐं अक्ली करै आप्पू लै खटअ त! अह गल्‍ल बी लागी मुंह बृथा।

20 एऊ संसारै आपणीं सारी मैन्थ करने बारै सोठी-सोठी हुअ हुंह खास्सअ दुखी। 21 हाम्हैं हआ खटणा लै सारी अक्ल, समझ़ अर तेता करा हाम्हैं खास्सै सज़ाण रही करै! खिरी पल़ा हाम्हां तेखअ सह कमाई इहै मणछा लै छ़ाडणीं ज़ुंणी तेता लै किछ़ै मैन्थ निं किई! अह गल्‍ल बी आसा बृथा अर अह गल्‍ल आसा बेघै बूरी। 22 एऊ संसारै एतरी खास्सी मैन्थ करी मणछा किज़ै पुआज़अ भेटा? ज़ाथी निं ज़ात किछ़ै! 23 सारी ज़िन्दगी काम करी निं दुख तकलिफी का सुआई होर किछ़ै भेटदअ! होर ता होर राची निं राम्बल़ै करै नींज बी एछदी! अह गल्‍ल बी आसा बृथा ई।

24 तेता का आसा इहअ भलअ कि हाम्हां ज़िऊंणीं आपणीं ज़िन्दगी खांदी-पिंदी राज्ज़ी-मौज़ी। पर एथ बी ज़ाण्हिंआं मुखा इहअ कि अह बी भेटा हाम्हां मणछा परमेशरा ई का! 25 ज़ै परमेशर कहा लै नांईं दैए, तै किधा का लाई राज्ज़ी-मौज़ी ज़िन्दगी काटी? 26 बिधाता दैआ अक्ल, ज्ञैन अर मौज़ तेऊ लै, ज़हा का सह खुश हआ, पापी मणछा डाहा सह खटदै, झाल़दै अर भढारा भर्दै लाई, ताकि तेता सह तिन्‍नां मणछा लै दैए, ज़हा का सह खुश आसा। ज़िहअ बागरी पिछ़ू पल़णअ बृथा हआ, तेही आसा अह गल्‍ल बी बृथा।

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