1 आपणैं ढब्बै लाआ दूर देशै बपारा लै, एक धैल़ी एछणी एही कि तेता करै हणअ थारअ खास्सअ नफअ। 2 तम्हैं करनै आपणैं ढब्बै साता-आठा ज़ैगा बपारा दी लाई, किल्हैकि तम्हां का किज़ै थोघ आसा कि आजू एऊ संसारै केही ज़ेही आफ़त पल़णीं होए।
3 पाणीं आल़ै बादल़ा करै हआ सरग, डाल़-बूट च़ाऐ ज़ेथ बाखा बी ढुल़े, सह रहा तिधी पल़ी। 4 ज़ुंण बिझै-बादल़ै सरगा न्हैल़अ भाल़अ लागा, सह नां बऊई सकदअ अर नां लऊई सकदअ। 5 नां कहा का इहअ थोघ हंदअ कि बागरी कैहा बाता डेऊई, नां कहा का इहअ थोघ हंदअ कि माए ओदरै लान्हअ किहअ करै बझ़ा! तै इहअ कुंण सका खोज़ी कि बिधाता किज़ै करनअ ज़ुंणी सोभै गल्ला आसा बणाईं दी? 6 दोत्तकै तारै का उडकै तारै तैणीं रहा बऊंदै लागी। कहा का हआ थोघ कि बेज़अ टिप्पणअ कि नांईं? या फसल राम्बल़ी हणीं कि माल़ी?
7 दोत्तकै धुप्पै भाल़णैं का बधिया निं एऊ संसारै किछ़ आथी, ज़िऊंदै बच़ी रहणअ आसा खास्सअ नोखअ। 8 मणछे अमर च़ाऐ ज़ेतरी बी खास्सी होए, पर तिंयां लोल़ी राज्ज़ी-मौज़ी ज़िऊई, पर अह गल्ल डाहणीं आद कि एक धैल़ी एछणी तिन्नां लै मरने बी, तेखअ निं तिन्नां धुप्पअ भाल़णअ भेटणअ, अर मरनै का बाद हाम्हां लै किज़ै हणअ ऐहा गल्लो थोघ निं हाम्हां कोही का आथी।
9 खारकै मणछो, आपणीं ज़ुआनी दी रहा नंद। खारकी अमरा रहा राज्ज़ी-मौज़ी, तेथ करा ज़िहअ थारअ दिल च़ाहा तिहअ। ज़िहअ-ज़िहअ भाल़ी तम्हां मज़अ एछा तम्हैं करा तेथ राज़। पर ऐहा गल्ला डाहै आद कि तम्हैं ज़िहअ बी करे, तेते साबै करनअ बिधाता थारअ नसाफ।
10 मन्नैं निं फिकर डाहणअ, तै रहणीं थारी देही नरोगी किल्हैकि बाल़ी अमर अर ज़ुआनी निं सदा रहंदी आथी। तेखअ हआ सोभै गल्ला बृथा।