16 ज़ुंण तम्हैं मसीहा का आसा शिखल़अ द, तिन्नां हर गल्ला मनी ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी परमेशरे मरज़ी दी। एकी-दुजै लै दैआ आपणीं अक्ल करै समझ़ाऊंणी अर सखाऊंणी ज़ुंण तम्हां परमेशरा का आसा भेटी दी। भज़न, गाऊंण अर आत्मिक गिहा करै रहा परमेशरे स्तोती अर शूकर करदै लागी।
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