मसीहे देहीओ एक हणअ
1 हुंह पल़सी आसा इधी मसीहा ईशूओ प्रच़ार करनै पिछ़ू कैद किअ द। हुंह करा तम्हां का अरज़ ज़ुंण परमेशरै एही ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै आसा छ़ांटै दै ज़ेता करै मसीहो अदर होए ज़ुंणी तम्हैं शादै दै आसा। 2 तम्हैं लोल़ी शरीफ, मानदार, सबर करनै आल़ै अर एकी दुजे गलती ज़िरी बी झ़ूरी करनै आल़ै। 3 आप्पू मांझ़ै करा एकी-दुजै संघै मेल़-ज़ोल़ा दी रहणें पूरी कोशिश ज़ुंण पबित्र आत्मां दैआ अर हाम्हां एक डाहा बणाईं।