25 इहअ करै झ़ुठअ बोल़णअ छ़ाडी बोला हरेक आपणैं साथी-संघी का शुचअ, किल्हैकि हाम्हैं आसा आप्पू मांझ़ै एकी देहीए आंग।4:25 कुलू. 3:9; रोम. 12:5; जक. 8:16
26 ज़ेभै तम्हां रोश्शै एछे, तेता करै निं लोल़ी थारै पाप हुअ, सान्हां का आजी लोल़ी थारअ रोश्श मुक्कअ।4:26 भज. 4:4
27 नां राख्सा लै दैआ आप्पू कबाता पाणैओ मोक्कअ।
28 च़ोरी करनै आल़अ निं ऐबै भिई च़ोरी करी पर भलै कामां करना लै लागै आपणैं हाथै खटदअ एते तैणीं लागी कि, ज़ै कहा ज़रुरत होए, तेभै लोल़ी तेऊ का किज़ै दैणा लै हुअ। 29 कोई बी नथोघी गल्ला निं लोल़ी थारी खाखा का निखल़ी, पर एही भली गल्ला करनी ज़ेता करै होरीए बी मज़त होए थारै बोल बोल़णैं करै लोल़ी शुणनै आल़ै मणछे बर्गत हुई।