4 पर बिधाता छ़ाडी समुंदरे पाणीं दी बडी ढिश-बागर अर समुंदरै लागी एही उछ़टी छ़ाल्ली लागी ज़हाज़ा दी एही ज़ोरै लागदी कि ज़हाज़ च़ाल्लअ त चुटी! 5 ज़हाज़ा दी बेठै दै सोभ लोग लागै डरै आपणैं देअआ-देबतै संज़रदै। ज़हाज़ा दी शुंआर सोभी लोगै शोटअ आपणअ ज़हाज़ा दी लादअ द समान समुंदरे पाणीं जैंदरी ताकि ज़हाज़ो बोझ़अ हल़कअ होए अर ज़हाज़ नां डुबे।
पर जोना डेऊअ ज़हाज़ा भितरी सोभी का थाल्ले मज़ला संघा रहअ तिधी घणीं निंजा सुत्ती!
7 खिरी लागै ज़हाज़ा दी शुंआर सोभ लोग एकी-दुजै लै बोल्दै, "हाम्हां पुछ़णै परच़ी पाई आपणैं देअ कि अह आफ़त हाम्हां मांझ़ै कहा करै पल़ी।" तेखअ पाई तिन्नैं परच़ी अर तेथ निखल़अ जोनो नाअं!
9 जोना दैनअ तिन्नां लै ज़बाब, "हुंह आसा इब्रानी, हुंह मना स्वर्गे परमेशर बिधाता ज़ुंणी धरती अर समुंदर आसा बणाअं द।"
12 जोना दैनअ ज़बाब, "मुंह शोटा ज़हाज़ा का बागै समुंदरै! तेखअ जाणी अह ढिश-बागर शांत हई। किल्हैकि मुखा आसा थोघ कि अह ढिश-बागर आफ़त आसा तम्हां लै मुंह ई करै पल़ी दी।"
15 तेखअ च़कअ तिन्नैं जोना संघा शोटअ समुंदरै, अर हेरा-हेरी हुअ समुंदरो ढिश-बागर अर छ़ाल्ली शांत। 16 ज़ांऊं इहअ हंदअ शुझुअ, ज़हाज़े सोभी लोगा पल़ी बिधाते डअर, अर तिन्नैं किऐ बिधाता लै बल़ीदान अर आजू लै बी मनी तिन्नैं एही मानत कि तिन्नां करनी सिधी बिधाते च़ाकरी।