1 हुंह आसा एलकोश नगरीओ नहूम गूर, अह समाद आसा मंऐं निनबे नगरीए बारै लिखअ द।
2 बिधाता करा ज़ल़न, सह आसा परमेशर ज़ुंण बदल़अ लआ
बिधाता छ़ाडा बदल़अ लणा लै आपणअ महान कोप संघा करा नसाफ।
सह मालक दैआ तिन्नां लै सज़ा ज़ुंण तेऊ का नफरत करा,
तिन्नां लै पाआ सह आपणअ कोप।
3 बिधाता का आसा महान बल, पर तज़ी बी करा सह सबर।
दोशी लोगा निं सह सज़ा दैणैं बाझ़ी छ़ाडदअ।
तेऊए एछणैं करै एछा बडी कुर्लू बागरी अर ढिश-बागर,
बादल़ आसा तेऊए खूरा हेठै धूल़ै ज़िहै।
4 सह सका एकी बैणै बडै-बडै दरैअ शकेऊई!
तेखअ हणीं बाशान मुल्खे रज़दी-पज़दी ज़ैगा शुक्की,
कर्मेल धारा बी पल़णअ शुक्कअ!
लाबानोन हरै-भरै बणैं शुक्कणैं खील-फूल पठ।
5 ज़ांऊं बिधाता एछा, बडै-बडै पर्बता छ़ुटा काम्मणीं अर धारा गल़ा पठ,
पृथूई दी हआ ज़ाज़री अर तेथ बस्सै दै सोभी ज़ीबा छ़ुटा दर्छ़णअ।
6 ज़ेभै तेऊ रोश्श हुई आई दी,
तेभै निं तेऊ सेटा कोह ज़िऊंदअ बच़ी सकदअ।
तेऊओ कोप निं कोह ज़िरी सकदअ!
तेऊओ कोप पल़ा आगीए दरैऊआ ज़िहअ,
बडी-बडी टोल्हा दी पल़ा बिधाता सम्हनै द्रटा।
7 बिधाता आसा भलअ,
सह करा आफ़ते पलका आपणीं परज़े फाज़त।
सह दैआ तिन्नां लै शरण ज़ुंण तेऊ बाखा फिरा।
8 सह पल़ा बडै दरैऊआ ज़िहअ चुटी संघा करा दुशमणा पठी खतम।
सह दरल़ाऊआ आपणैं दुशमणा तेथ बाखा ज़ेथ बाखा न्हैरअ अर मौत आसा।
9 तम्हैं बिधाता लै किज़ै बिक्री सोठदै आसा लागै दै?
तेऊ करनअ थारअ बनाश।
सह निं आपणैं दुशमणा दुजी बारी खल़ै उझ़दै ई छ़ाडदअ।
10 सह हणअ इहअ कि तिंयां हणैं घणैं कांडे झ़ाकल़ै शाचै दै,
तिंयां हणैं खास्सी शराब झुटै दै शराबी ज़िहै।
तिंयां हणैं शुक्कै ज़ोल़्ठै ज़िहै झ़ट च़ारै दझ़ी खतम।
11 निनबे माहा नगरी! तेरअ राज़अ आसा बिधाता लै कदुष्ट बिक्री सोठदअ लागअ द! 12 बिधाता बोला यहूदा मुल्खे परज़ा लै, "निनबे नगरीए लोग च़ाऐ ज़ेतरै बी खास्सै अर ज़िहै बी बलबान होए, मुंह करनअ तिन्नों बनाश अर तिंयां हणैं पठी खतम। तम्हां यहूदा मुल्खे मेरी परज़ा लै दैनी मंऐं सज़ा, पर ऐबै निं हुंह तम्हां लै भिई सज़ा दैंदअ। 13 ऐबै काढणअ मुंह थारै कैल़ै का अश्शूर देशे गलामीओ जूँ पोर्ही, थारै हाथा-खूरा का शांघल़ी लोहै चोल़ी करनै मुंह तम्हैं आज़ाद।"
14 अश्शूर देशे राज़धानी निनबे नगरीऐ! बिधाता बोला ताल्है इहअ, "तेरी निं आजू आद-लुआद किछ़ै हणीं अर तेरै खिंबो हणअ नाअं ई खतम। मुंह करनी ज़ैगै-ज़ैगै त देहुरै तेरी काठ, पात्थर अर धातू करै बणाईं दी मुहुर्ती खतम। मंऐं लाई ताल्है डुघी घोर डाही कोती किल्हैकि तूह आसा कदुष्ट।"
15 यहूदा मुल्खे परज़ा! उझै दैआ धारा बाखा नदर! तेथ बाखा आसा खुशीए समादा खोज़णैं आल़अ दूत एछदअ लागअ द। तेऊ करनअ मेल़-ज़ोल़। आपणअ खास थैर मनाऊंआं अर बिधाता लै करा आपणीं मानत पूरी। ऐबै निं कदुष्ट थारै मुल्खा बाती एछणैं, तिंयां हेरै पठी खतम करी।