13 शूणां, ज़ै तम्हैं ऐहा आपणीं देहीए पापी सभाबे साबै ज़िन्दगी काटे, तम्हैं हणैं परमेशरा का दूर, पर ज़ै तम्हैं पबित्र आत्में शगती करै आपणीं देहीए पापी सभाबा मारी पाए, तै रहणैं तम्हैं ज़िऊंदै। 14 तैही ज़ेतरै बी लोग परमेशरे आत्में साबै ज़िन्दगी काटा, तिंयां ई आसा परमेशरे लुआद।
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