12 आहया तमारी मोंग नी बठक मे तमारी ह़ाते खाय-पीय, दर्या मे ह़तायला दगड़ान तेम से, अने आह़फा नु पेट भरवा मे ध्यान राखत्ला से; तीहया पाणी वगर नु वादळु से, जीने वाहळु उडाड़ ली जाय; आहया आसवा झाड़का से, जे फालवा नी टेम पोर बी नी फाले, जे बे कावा मर जाय, अने मुळ्या भेळ उखड़ी ज्या,