1 मे डायलान तां गेथी मोंगाळ्ळा गयुस ना नामे, जीनी सी मे खरलो मोंग करु।
2 ए मोंगाळ्ळा, मारी आहयी वीन्ती से; जेम तु आत्मा मे वद र्यो, तेमेत बीजा कामु मे बी वदता जावो अने वारला रेवो। 3 काहाके जत्यार भरहो करन्या भाय-बेन्या आवीन तारी तीहयी सच्चाय नी गवाय देदा जीनी पोर तु ह़ाचलीन चाले ता मे घण-जबर खुस हयो। 4 मने आनी गेथी मोटी अळी कानी बी खुसी नी हय, के मे ह़मळु, के मारा सोरा-सोरी सच्चाय पोर चालत्ला।
5 ए मोंगाळ्ळा, जे कंय तु तीहया भायु ह़ाते करत्लो, जे अंजाण्या बी से, तीने ईमानदारी सी कर र्यो। 6 तीहया मंडळी नी अगळ तारा मोंग नी गवाय देदला से: कदीम तु तीमने तीनीन तेम वळावही जेम भगवान ना माणहु जुगु वारु से। ता वारु रेहे। 7 काहाके तीहया ते मसी ना नाम नी लेदे नीकळला से, अने आड़जात्या माणहु पांह कंय नी लेय। 8 एतरे आमु भरहो करन्या एवा माणहु नी मदत करवा जोवे, जीनी सी आमु बी सच्चाय नी सेवा मे साजल्या बणया।
9 मे मंडळी ने चीट्ठी लीखलो हतो, पण दीयुत्रेफेस जे तीमनी मे मोटो बणवा हींडतो हतो, अमारी वात नी मान्तो हतो। 10 एतरे मे जत्यार आवही ता तीना कामु नी जे तीहयो कर र्यो, फोम करावही, के तीहयो अमारा बारा मे गलत-गलत वात केय; अने आनी पोर बी राजी नी रीन आह़फोत भायु ने नी अवरे, अने जे तीमने जे अवरवा हींडे तीमने रोके अने मंडळी सी नीकाळ देय।
11 मोंगाळ्ळा माणहु, बुराय ने तेवी नी पण भलाय नी चाल चालो काहाके भलाय भगवान नी से; अने जे बुराय करवा वाळो से तीहयो भगवान ने नी देख्यो।
12 दीमेत्रीयुस ना बारा मे आखा अने सच्चाय बी आह़फीत गवाय देदी, अने आमु बी गवाय दीया अने तमु जाणे के अमारी गवाय खरली से।
13 मने तारी जुगु घणु लीखवा नु हतु, पण संय अने पेम सी लीखवा नी हींडतो हतो। 14 पण मारी आह से के मे तारी ह़ाते घण छोटो भेटीन आंबा-सांबा हय्न वात करही।
15 तने सांती जड़े आञे ना ह़ाती तने आवजे अने आवही केय, अने तां वाळा एक-एक ह़ाती ने नाम ली-लीन आवही अने आवजे की देजे।