1 अळतेण मे वादळा मे एक अळी वहराड़ नाखे एवी अने मोट्ली अने ह़तायली सेलाणी देख्यो, मे देख्यो के ह़ात ह़रगदुत आखरी ह़ातोव गरा ली र्या, आहयु आखरी खत्तम हयणु से। काहाके आमनी ह़ाते भगवान नी रीह बी खत्तम हय जाय।
2 अळतेण मने एक काच ने तेवी दर्या देखायी; जीनी मे मान लेवो आक्ठु भेसकायलु हय। अने मे देख्यो के जे तीहया जानवर नी मुर्ती पोर अने तीना नाम ना आकड़ा पोर जीक जेला हता, तीहया बी काच ना दर्या पोर उबा हय र्या हता, अने तीहया भगवान ना आपला तम्बुरा ली र्या हता। 3 तीहया भगवान ना चाकर्या मुसा नु गीत, अने गाडरु नु गीत गाव्वा बाज र्या हता,
"ए जोरभर्या मालीक भगवान,
तारा काम सेल-भात्या अने मोटा से;
ए आखी जाती ना राजा,
तारी वाट वारली अने खरली से।"
4 "ए मालीक,
कोय तारी सी नी बीहे अने तारा नाम नी
बड़ाय नी करे?
काहाके तु एतरोत चोखलो से।
आखी जाती आवीन तारी भक्ती करहे,
काहाके तारा नीयाव ना काम आखा पोर उजन्ता हय जेला से।"
5 आनी बाद, मे देख्यो के ह़रग मे नो मंदीर मतलब गवाय ना चोखलु तम्बु ने उगड़लु देख्यो। 6 अने तीहया ह़ातोव ह़रगदुत जीमनी पांह ह़ातोव गरा हती, चोखला अने पपलन्या लुगड़ा पेरीन अने छाती पोर ह़ोना नी पट्टी बांदीन मंदीर मे गेथा नीकळ्या। 7 ता तीहया च्यारोव जीव मे गेथो एक तीहया ह़ातोव ह़रगदुत ने भगवान ना, जे जलमको जीवत्लो से, तीनी रीह ना भरला ह़ोना ना ह़ात कटोरा आप्यो; 8 अने भगवान नी बड़ाय अने तीनी ताखत ना कारण सी मंदीर धुकरा सी भराय ज्यो, अने जत्यार तक तीहया ह़ातोव ह़रगदुत नी ह़ातोव गरा खत्तम नी हयी तांह तक कोय मंदीर मे नी जाय सक्यु।