1 आनीन करते के मसी डील मे हय्न दुख झेल्यो ता तमु बी तीहयी हेर ने हत्यार ने तेम धर लेवो, काहाके जे डील मे दुख झेल्यो तीहयो पाप सी छुट ज्यो। 2 काहाके तमारी रेली जीवाय, डील नी लालच ना लारे नी पण भगवान नी मरजीन अनसारे जीव्वा जोवे। 3 काहाके जे वात आड़जात्या करवा चाहता हता, अने लुच्चाय नी बुरी लालच, खोड़ला काम करवा, छीनाळु, छाकीन लथ-पथ रेवा, अने मुर्ती पुजा करवा मे उदड़ेत टेम गमाया एतरुत घणु। 4 आनी सी तीहया वहराय करे के तमु एवा भारी लुच्चाय मे तीमनो सात नी देता, अने आनीन करते तीहया तमारु नामबद्दी करे। 5 पण तीहया तीने जे जीवत्ला अने मरला नो नीयाव करवा तीयार से तीने लेखो आपवा पड़हे। 6 काहाके मरला माणहु ने बी, खुस-खबर आनीत करते ह़मळावलो हतो। के माणहु नी अनसारे डील मे ते नीयाव हयहे, पण आत्मा मे डील भगवान ने तेम जीवत्ला रेहे।
7 आखी वात छोटीत खुटवा वाळी से, आनी लेदे नीचळा हय्न वीन्ती जुगु चेतीन रेवो। 8 अने आखान मोटी वात आहयी से के तमु एक-बीजा सी खरलो मोंग करो; काहाके मोंग आखा पापु ने ढाक देय। 9 कुड़कुड़ कर्या वगर, एक-बीजा ने पोरणा करो। 10 जीने जे वाटो जड़लो से, तीहयो तीने भगवान ना आखी भाती नी संयबरकत ना भला पुंजारान तेम एक-बीजा नी सेवा मे लगाड़े। 11 कदीम कोय बोले, ता आसम बोलवा जोवे के मानो भगवान ना बोलु हय; कदीम कोय सेवा करे, ता तीहयी सक्ती सी करे जे भगवान आपे; जीनी सी आखी वात मे ईसु मसी नी लारे, भगवान नी बड़ाय उजन्ती हये। बड़ाय अने ताखत जलमकी तीनीत से। आमीन।
12 ए मोंगाळ्ळा, जे दुख ना वेह मे आक्ठु तमने पारखवा जुगु तमारी मे भड़कली से, आनी सी आहयु ह़मजीन ना वहरावो के कानी बीजीत वात तमारी पोर वीत र्यी। 13 पण जीसम-जीसम मसी ना दुख मे साजल्या बणो, ता खुस हयो, जीनी सी तीनी बड़ाय उजन्ती हयहे तीहयी टेमे खुस हयो। 14 अळतेण कदी मसी ना नाम ना लेदे तमारी बुराय करे, ता तमु जुगाळा से, काहाके बड़ाय नी आत्मा जे भगवान नी आत्मा से, तमारी पोर साहळो करे। 15 तमारी मे गेथो कोय बी माणेह हत्यारो नीता चोट्टो नीता गलत काम करन्यो, नीता बीजा ना काम मे हात नाखवान लेदे दुख नी उठावा जोवे। 16 बाखीन कदीम ईसु मसी वाळा हयवा सी दुख झेले, ता लजवायजो नी। पण आहयी वात जुगु भगवान नी बड़ाय करे।
17 काहाके तीहयी टेम आय लागली से, के पेले भगवान ना माणहु नो नीयाव करे, अने जत्यार के नीयाव करवा अमारीन्तां गेथु सुरु हयहे ता तीहया माणहु नु ह़ु हयहे जे भगवान नी खुस-खबर ने नी मान्ता। 18 अने
धरमी माणेह नेत छुटकारो हात करवा काठु से,
ता भक्ती नी करे अने पापी नु ह़ु हयहे?
19 आनीन करते जे भगवान नी हेर ना अनसारे दुख झेले, तीहया भलाय करता जाय्न आपणा-आपणा जीव ने भरहो करे एवा बणावण्या ना हात मे ह़ोप देय।