24 का तुमला नही मालूम सेत, का धावन को मैदान मा सबच धावासे, पर कोनी एक ला ईनाम मीलासेत। मजे तुमी असो धावो का ईनाम तूमी ला भेटे। 25 सबा धावन वारा धिरज यो काजी राखासेत, का वोला जीत को मुकुट मिलनो सेत। पर आमी तो कदी नास नही होवन वारा अमर मुकुट काजी मेहनत करसेजन। 26 एकोलाय मी एक "निसान साधके तीर चलावसू" मी अन्दाज लक तीर नही छोड़से 27 मी आपरो देह ला तकलीप देवासू, अना वोला आपरो बस मा राखासू। कही असो ना भई जाय का दुसरो ला परचार को मघा, मी खुद वोको पर चलनवारा नही बनू कही लोक असो ना कव्हे का "दियो खाल्या अँधार सेत।"