मसीही जोड़ा
1 असो पिरकार, अवो बायका गीन अपरो-अपरो नवरा गीन को बस मा रहवो। जेनको लक अदी कोनी परमेस्वर को वचन ला नही मानासे। त वय तुमरो पवीतर अना भेव सकट चाल-चलन ला ध्यान लक चोवके बिना कोनी बारता को अपरी-अपरी बायका गीन को बरताव लक जीतयो जाहे। 2 तुमरो सजनो-सवरनो परमेस्वर को डर मा होय,बल्की देखावटी नही होहे। 3 जसो चुन्दी ला गुथनो, सोनो को जेवर बनावनो अना रकम-रकम का कपरा घालनो। 4 पर तुमरो सिंगार तो तुमरो मन को भीतर मा बस्यो मानूस की सिंगार होवनो पाहिजे। नरम अना सांत मन वालो, अविनासी सही जेवर गीन लक कियो सिंगार परमेस्वर की नजर मा लगत किमती से। 5 काहेकी जूनो जमाना मा पवीतर आई-माई गीन भी जोन परमेस्वर मा आस राखा सेति। अपरा-अपरा नवरा गीन को अधिन रहके अपरो रिती-रिवाज को जसो सज्जत सवरत होतीन। 6 वसोच सारा, अबराहम ला मालिक कहके वोको अधिन रव्हत होती। अदि भी बीना भेव को भलो काम करासेत तो तुमी भी परमेस्वर को टूरी सेव।