16 मि बाबूजी लक बिनती करुहुँ अना उ तुमला एक अखीन सहारा देहे की उ सदा तुमरो सँग रव्हे 17 मजे खराई को आतमा, जेनला ना तो जगत अपनाव सकासे, ना ओला जानासे, काहे की उ तुमरो संग च रव्हासे अना तुममा च होहे।"
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16 मि बाबूजी लक बिनती करुहुँ अना उ तुमला एक अखीन सहारा देहे की उ सदा तुमरो सँग रव्हे 17 मजे खराई को आतमा, जेनला ना तो जगत अपनाव सकासे, ना ओला जानासे, काहे की उ तुमरो संग च रव्हासे अना तुममा च होहे।"
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